लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर (LCH) 
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भारतीय वायुसेना को मिला पहला स्वदेशी LCH हेलीकॉप्टर 'प्रचंड', कारगिल युद्ध में महसूस हुई थी इसकी कमी

इस LCH हेलीकॉप्टर को जोधपुर में ही तैनात किया जाएगा और इसे हिन्दुस्तान ऐरोनॉटिक्स लिमिटेड ने बनाया है।

Pawan Kaushal

भारतीय वायुसेना ने इतिहास रचते हुए पहले स्वदेश निर्मित लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर (LCH) को अपने फाइटर फ्लीट में शामिल कर लिया है। जोधपुर में केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की मौजूदगी में इस हेलीकॉप्टर को वायुसेना में शामिल किया गया। इस LCH हेलीकॉप्टर को जोधपुर में ही तैनात किया जाएगा और इसे हिन्दुस्तान ऐरोनॉटिक्स लिमिटेड (Hindustan Aeronautics Limited) (HAL) ने बनाया है। इस हेलीकॉप्टर को बनाने में करीब 45 फीसदी स्वदेशी सामान का इस्तेमाल हुआ है जिसके भविष्य में 55 फ़ीसदी तक पहुँच जाने की उम्मीद है। यह स्वदेशी निर्मित हेलीकाप्टर इतना खतरनाक है कि इसका नाम 'प्रचंड' रखा गया है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, भारतीय सेना को 5 हेलीकॉप्टर मिलेंगे, और भारतीय वायुसेना को 10.

इस लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर (LCH) को विशेष तौर पर ऊंचाई वाले इलाकों में तैनात करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, और इसमें दो लोगों के बैठने की जगह है। इसका वजन करीब 5.8 टन है और इसकी लम्बाई 51.1 फ़ीट। साथ ही इसकी ऊंचाई 15.5 फीट है, इसकी रफ्तार 270 किलोमीटर प्रतिघंटा है और इसमें दो इंजन लगे हुए हैं। इसकी कैनन से हर मिनट 750 गोलियां दागी जा सकती हैं।

यह हेलीकाप्टर अपनी कैटेगरी में दुनिया में सर्वश्रेष्ठ है और इसको मुख्य रूप से ऊंचाई वाले इलाकों में तैनात करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जैसे की पहाड़ों वाला सियाचिन इलाका। यह हेलीकाप्टर 16,400 फीट की ऊंचाई से दुश्मन पर प्राणघातक हमला कर सकता है और दिन और रात में भी आसानी से ऑपरेशन को अंजाम देने में पूरी तरह से सक्षम है।

इसके साथ ही यह लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर (LCH) किसी भी तरह के मौसम में किसी भी तरह के ऑपरेशन को सफल बनाने में सक्षम है। हेलीकाप्टर थलसेना (सेना की भूमि-आधारित दल की शाखा), टैंको, बंकरों, ड्रोनों को भी आसानी से अपना निशाना बना सकता है और दुश्मन से रडार को चकमा देने में भी पूरी तरह से सक्षम है।

लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर (LCH)

यह लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर (LCH) चार 70 या 68 MA रॉकेट ले जाने में सक्षम है फॉरवर्ड इंफ्रारेड सर्च, सीसीडी कैमरा और थर्मल विज़न और लेज़र रेंज फाइंडर से भी लैस है। इसकी रेंज 550 किलोमीटर तक है और दो इंजन वाले इस LCH में पायलट के अलावा एक गनर भी बैठ सकता है। खाली हेलीकाप्टर का वजन 2,250 किलो है और हथियार के वजन के साथ यह 5800 किलोग्राम का हो जाता है। LCH हवा से हवा में और हवा से जमीन पर गोलियों से लेकर मिसाइल तक दाग सकता है। दुश्मन के हमले पर यह पायलट व गनर को अलर्ट भी कर देगा।

कारगिल युद्ध में लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर की कमी महसूस हुई थी

1999 कारगिल युद्ध

आपको बता दें कि 1999 में कारगिल की लड़ाई के दौरान पहली बार भारतीय सेना में एक ऐसे हेलीकाप्टर की जरूरत महसूस की गई थी जो ऊंचाई पर उड़ सके और दुश्मन पर हमला बोल सके। उस वक्त ऐसा एक भी हेलीकाप्टर भारत के पास नहीं था जिसकी वजह से पहाड़ी की ऊँची ऊँची चोटियों पर बैठे दुश्मनों ने भारतीय फ़ौज का काफी नुक्सान किया था।

अगर उस वक़्त लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर (LCH) होता तो सेना पहाड़ों की छोटी पर बैठी पाकिस्तानी सेना के बंकरों को आसानी से तबाह किया जा सकता था।

कारगिल युद्ध को 23 साल हो चुके हैं। 'ऑपरेशन विजय' भारत ने जम्मू-कश्मीर के कारगिल सेक्टर, जो अब लद्दाख है, में पाकिस्तान के खिलाफ लड़ा था।

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