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यूपी में 2000 चावल की मिलों को दिया जाएगा आधुनिक रूप, उपज और फ़ूड सिक्योरिटी होगी बेहतर

इन चावल की मिलों में हाई क्वालिटी के अनाज का उत्पादन हो सके, इसके लिए नयी इनोवेटिव मशीनरी और तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा।

Aastha Singh

अपनी तरह के पहले प्रयास में, उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य भर में 2000 चावल की मिलों को आधुनिक रूप देने का कार्य शुरू किया है। इन मिलों में हाई क्वालिटी के अनाज का उत्पादन हो सके, इसके लिए नयी इनोवेटिव मशीनरी और तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा। रिपोर्ट के अनुसार, यह पूरी योजना उत्तर प्रदेश के खाद्य और पोषण सुरक्षा में आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को पूरा करने के लिए डिज़ाइन की गयी है। यह योजना एक साथ रोजगार सृजन और धन सृजन को भी बढ़ावा देगी।

फ़ूड सिक्योरिटी के लक्ष्य की ओर

फ़ूड एंड सिविल सप्लाइज, कमिश्नर सौरभ बाबू के अनुसार, उत्तर प्रदेश में निजी चावल की मिलों का आधुनिकीकरण सरकार द्वारा किए गए अनिवार्य प्रावधानों के अनुसार किया जाएगा। विभाग जल्द ही यूपी राइस मिलर्स एसोसिएशन और मिल मालिकों के साथ एक बैठक बुलाएगा।

देश में सबसे पुराना एग्रो प्रोसेसिंग उद्योग माना जाने वाला, चावल की मिलें, अनाज उद्योग के सबसे बड़े खिलाड़ियों में से एक है। इसका आधुनिकीकरण और उन्नयन घरेलू उत्पादन की गुणवत्ता में काफी सुधार करेगा और अंत में फ़ूड सिक्योरिटी को बढ़ावा देने में मदद करेगा।

चावल उत्पादन की क्षमता और गुणवत्ता में सुधार के लिए नई तकनीक

रिपोर्ट से पता चलता है कि राज्य में लगभग 757 बड़ी मिलें हैं, जिनकी क्षमता 4 टन प्रति घंटे से अधिक है। दूसरी ओर, छोटी इकाइयों की संख्या लगभग 1,157 है, जिनकी मिलिंग क्षमता 4 एमटी प्रति घंटे से कम है।

छोटे पैमाने की मिलों में सीमित क्षमता पारंपरिक मशीनों के कारण होती है और इन पुराने उपकरणों का उत्पाद की गुणवत्ता पर भी प्रभाव पड़ता है। ऐसी इकाइयों द्वारा संसाधित चावल एफसीआई (भारतीय खाद्य निगम) के मानदंडों को पूरा नहीं करते हैं, इस प्रकार कम कीमतों पर भी बिकते हैं। इसलिए, एक मशीनरी उपग्रडेशन, मिल की क्षमता निर्माण में सुधार लाने और चावल की गुणवत्ता में सुधार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

इस उद्देश्य के लिए खाद्य और नागरिक सप्लाई विभाग चावल मिल मालिकों को प्रेरित करेगा और उन्हें प्रौद्योगिकी के उपयोग के बारे में अवगत करेगा। जल्द ही एक मानदंड स्थापित किया जाएगा जिसमें नई मशीनरी का उपयोग करने वाली चावल मिलों को सूचीबद्ध किया जाएगा। यहां यह ध्यान दिया जा सकता है कि सरकार इसके लिए कोई धन उपलब्ध नहीं कराएगी। हालांकि चावल मिल मालिकों को एमएसएमई (MSME) के जरिए कर्ज लेने की सलाह दी जाएगी।

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