यूनेस्को का विश्व धरोहर स्थल 'खजुराहो' भारतीय स्थापत्यकला की एक नायाब मिसाल है

यूनेस्को का विश्व धरोहर स्थल 'खजुराहो' भारतीय स्थापत्यकला की एक नायाब मिसाल है

कानपुर शहर से 222 किलोमीटर दूर स्थित खजुराहो मंदिरों, म्यूजियमों और ऐतिहासिक विशेषताओं का केंद्र है।

प्राचीन पर्यटक आकर्षण और पुरातात्विक (archeological) स्थल, खजुराहो भगवान शिव, विष्णु और जैन पितरों को समर्पित विभिन्न प्रकार की कलात्मक मंदिरों के लिए जाना जाता है। यह स्थान 9वीं से 11वीं शताब्दी के समृद्ध और गौरवशाली चंदेल वंशकाल से शोभायमान है। खजुराहो मध्य भारत के मध्य प्रदेश के केंद्र में स्थित है, जो चंदेला राजाओं की राजधानियों में से एक था जिन्होंने इसे जटिल नक्काशी, स्थापत्य कला और सबसे लोकप्रिय कामुक मूर्तियों के साथ सजाया था।

खुजराहो के मंदिर सदियों से कई कारणों की वजह से आकर्षण का केंद्र रहे हैं और सबसे लोकप्रिय कारण यह है कि कई खजुराहो के मंदिरों पर कामुक दृश्यों के रूप में नक्काशी हैं। लेकिन जब आप खजुराहों में होंगे तब आप वास्तव में ये समझ पाएंगे की यहां कामुक नक्काशी के अलावा भी बहुत कुछ देखने और जानने योग्य है। यहां के कुछ मंदिर, वास्तव में, जीवन के उन विचारों को स्पष्ट करते हैं जहां कुछ प्रेरणादायक बनाने के लिए सौंदर्य वस्तुओं को शामिल किया जाता है।

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