रत्नेश्वर महादेव मंदिर (Ratneshwar Mahadev Temple)
रत्नेश्वर महादेव मंदिर (Ratneshwar Mahadev Temple)

'रत्नेश्वर मंदिर'- वाराणसी का अद्भुत मंदिर जो करीब 400 सालों से 9 डिग्री झुका हुआ है

कुछ रिपोर्ट के अनुसार, रत्नेश्वर मंदिर की ऊंचाई 74 मीटर है, जो इटली के लीनिंग टावर ऑफ़ पीसा से लगभग 20 मीटर अधिक है।

स्थानीय लोगों और पर्यटकों द्वारा दुनिया के सबसे अनोखे शहरों में से एक के रूप में वर्णित, 'वाराणसी' उर्फ 'बनारस' या 'काशी', उत्तर प्रदेश में शांति का मनमोहक गढ़ है। इस प्राचीन शहर में पर्याप्त मंदिर हैं जो भारत की धार्मिक एवं आध्यात्मिक संस्कृति का सटीक उदाहरण हैं। लेकिंन मणिकर्णिका घाट (Manikarnika Ghat) के पास स्थित रत्नेश्वर महादेव मंदिर (Ratneshwar Mahadev Temple) जैसा कोई मंदिर नहीं है। रत्नेश्वर मंदिर महादेव को समर्पित है। इसे मातृ-रिन महादेव मंदिर या काशी करवट के नाम से भी जाना जाता है। जिसका मतलब होता है काशी में एक मंदिर है, जो एक तरफ झुका हुआ है।

मंदिर स्वयं में एक रहस्यमयी पहेली है

रत्नेश्वर महादेव मंदिर - लीनिंग टावर ऑफ़ पीसा, इटली
रत्नेश्वर महादेव मंदिर - लीनिंग टावर ऑफ़ पीसा, इटली

कुछ सूत्रों का कहना है कि मंदिर का निर्माण 19वीं शताब्दी के मध्य में हुआ था। 1860 के दशक की मंदिर की कुछत स्वीरें हैं जिनसे मंदिर की पौराणिकता एवं धार्मिक महत्त्व का पता चलता है। मंदिर के शिखर का निर्माण नागर शिखर शैली के अनुसार एक फमसन मंडप के साथ किया गया था जो खंभों से सुशोभित है।

मंदिर एक बहुत ही असामान्य स्थान पर स्थित है। वाराणसी में गंगा नदी के तट पर स्थित अन्य सभी मंदिरों के विपरीत, मंदिर बहुत निचले स्तर पर बना हुआ है, ताकि मानसून के दौरान जल स्तर मंदिर के शिखर भाग तक पहुंच सके। इस मंदिर का गर्भगृह वर्ष के अधिकांश समय गंगा नदी के नीचे रहता है। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, मंदिर की ऊंचाई 74 मीटर है, जो इटली के लीनिंग टावर ऑफ़ पीसा से लगभग 20 मीटर अधिक है।

रत्नेश्वर मंदिर के बारे में सब कुछ एक पहेली है, बहुत सारे सिद्धांतों और मिथकों को जोड़कर मंदिर के भिन्न अस्तित्व से जुड़े सवालों का कोई जवाब नहीं है। माना जाता है की मंदिर का झुका हुआ होना एक श्राप के कारण है। एक कहानी के अनुसार, राजा मान सिंह के नौकर ने अपनी मां रत्ना बाई के लिए मंदिर का निर्माण किया और गर्व से अपने कर्ज का भुगतान करने का दावा किया। चूंकि एक मां का कर्ज कभी नहीं चुकाया जा सकता है, रत्नाबाई ने मंदिर को शाप दिया और वह झुकना शुरू कर दिया। इसी कहानी से मंदिर को एक अन्य नाम मिला है जो है मात्र ऋण।

1953 की तस्वीर में मंदिर एक तरफ झुका हुआ है
1953 की तस्वीर में मंदिर एक तरफ झुका हुआ है

एक और कहानी है जो लोगों में मानी जाती है, वह अहिल्या बाई होल्कर (मराठा साम्राज्य की रानी) की दासी की है। मंदिर बनते ही अहिल्या बाई की दासी ने मंदिर का नाम अपने नाम कर लिया, जिससे अहिल्या बाई नाराज हो गईं। उन्होंने मंदिर को श्राप दिया जिससे वह एक तरफ झुक गया। मंदिर के अस्तित्व को लेकर कई कथाएं हैं लेकिन वास्तव में मंदिर का निर्माण किसने और कब किया यह अभी भी अज्ञात है।

मंदिर अतीत में सीधा खड़ा था                        

1832 की तस्वीर जहाँ रत्नेश्वर महादेव मंदिर सीधा नज़र आ रहा है
1832 की तस्वीर जहाँ रत्नेश्वर महादेव मंदिर सीधा नज़र आ रहा है

पुरानी तस्वीरों में मंदिर को सीधा खड़ा देखा जा सकता है। हालाँकि, आधुनिक तस्वीरों में, यह तिरछा दिखता है। जानकारी के अनुसार, एक बार घाट ढह गया था और झुक गया था, जिससे मंदिर तिरछा हो गया था। आध्यात्मिक स्थलों में रूचि रखने वालों को छोड़कर बड़ी संख्या में यात्रियों को अभी तक मंदिर के बारे में पता नहीं है।

लेकिन फिर भी, यह भारत में विशाल गंगा नदी के खूबसूरत दृश्य के साथ वास्तुकला के आश्चर्यजनक और विस्मयकारी स्थानों में से एक है।

रत्नेश्वर महादेव मंदिर (Ratneshwar Mahadev Temple)
वाराणसी को SCO की पहली पर्यटन एवं सांस्कृतिक राजधानी चुना गया, जानें क्या होगा फायदा
रत्नेश्वर महादेव मंदिर (Ratneshwar Mahadev Temple)
भारत माता मंदिर वाराणसी - जहाँ मकराना मार्बल से बना अविभाजित भारत का नक़्शा है
रत्नेश्वर महादेव मंदिर (Ratneshwar Mahadev Temple)
UP के मिर्ज़ापुर स्थित चुनार फोर्ट पर शासन करने वाले हर राजा ने भारत के भाग्य पर भी शासन किया

To get all the latest content, download our mobile application. Available for both iOS & Android devices. 

Related Stories

No stories found.
Knocksense
www.knocksense.com