उत्तर प्रदेश के दुधवा टाइगर रिजर्व और पीलीभीत टाइगर रिजर्व के संयुक्त वन क्षेत्र में जल्द ही एक नया एलिफैंट रिजर्व बनने वाला है। यहाँ बनने वाले तराई एलिफैंट रिजर्व को अगले दो महीनों के भीतर बनाया जाना है। रिपोर्ट के मुताबिक, नया एलिफैंट रिजर्व 3000 वर्ग किलोमीटर में फैला होगा।
रीवाइविंग प्रोजेक्ट एलिफैंट, 1992
विशेष रूप से, प्रोजेक्ट हाथी के तहत तराई हाथी रिजर्व की स्थापना की जाएगी। पर्यावरण और वन मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा 1992 में शुरू की गई, इस पहल का उद्देश्य एशियाई हाथियों की आबादी के लिए राज्यों द्वारा वाइल्डलाइफ मैनेजमेंट के प्रयासों को वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान करना है।
इसके अतिरिक्त, परियोजना हाथियों की आबादी को उनके प्राकृतिक आवासों और कॉमन माइग्रेशन कॉरिडोर की रक्षा करके लंबे समय तक जीवित रखना चाहती है।
क्षेत्र के किसानों के लिए वरदान
हाथियों की लुप्त हो रहीं प्रजातियों और उनके आवास को संरक्षित करने के अलावा, यह पहल इस क्षेत्र के किसानों के लिए भी बेहद फायदेमंद साबित होगी। चूंकि जंगली हाथियों से न केवल खुद को नुकसान पहुंचाने बल्कि संपत्तियों को नष्ट करने, फसलों को नुकसान पहुंचाने और लोगों को नुकसान पहुंचाने का जोखिम काफी होता है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, दुधवा टाइगर रिजर्व में वर्तमान में नर, मादा और बच्चों सहित कुल 149 जंगली हाथी और 25 अन्य कैंप पचीडर्म (pachyderms) हैं।
विशेषज्ञों का दावा है कि डीटीआर में अधिकांश जंगली हाथी भोजन, पानी और आश्रय की तलाश में नेपाल के रॉयल शुक्लाफांटा वन्यजीव अभयारण्य से आए हैं।
तराई हाथी रिजर्व की अधिसूचना के साथ, रामनगर, ढाकिया तल्लुके महाराजपुर, गुन्हन, गोरखडिब्बी और अन्य पीलीभीत गांवों के किसान केंद्र सरकार से वित्तीय सहायता प्राप्त करने के पात्र होंगे। तराई हाथी रिजर्व के बनने के साथ मानसून के मौसम में प्रवासी हाथियों द्वारा फसल को हुए नुकसान का मुआफज़ा भी किसानों को मिल सकेगा।
मानव-हाथी संघर्ष को कम करेगा रिजर्व
तराई हाथी रिजर्व के बारे में बात करते हुए, उत्तर प्रदेश के मुख्य वन्यजीव वार्डन, संजय सिंह ने कहा, “नए हाथी रिजर्व, जिसे भारत सरकार द्वारा मंज़ूर किया गया है, को तराई हाथी रिजर्व (टीईआर) के रूप में जाना जाएगा। परियोजना का उद्देश्य जंगली हाथियों, उनके आवासों और गलियारों की रक्षा करना है। इसके अतिरिक्त, रिजर्व तराई क्षेत्र में मानव-हाथी संघर्ष को कम करने में भी मदद करेगा, जिससे पीलीभीत और लखीमपुर खीरी के भारत-नेपाल सीमा क्षेत्रों में रहने वाले किसानों और ग्रामीणों की रक्षा होगी।
