हाथी भोगेश्वर (Bhogeshwara)  
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Bhogeshwara - एशिया के सबसे लंबे दांत वाले हाथी 'भोगेश्वर' का निधन, दांत निकालकर मैसूर भेजा गया

भोगेश्वर को "मिस्टर काबिनी" के नाम से भी जाना जाता था। भोगेश्वर के लंबे दांत उसे दुर्लभ बनाते थे। उसका एक दांत 2.34 मीटर और दूसरा 2.54 मीटर का है।

Aastha Singh

कर्नाटक और तमिलनाडु के बॉडर पर स्थित मशहूर काबिनी बैकवाटर (Kabini Backwaters) में रहने वाले शानदार और प्यारे हाथी भोगेश्वर (Bhogeshwara) की 60 वर्ष की आयु में प्राकृतिक कारणों से मृत्यु हो गई। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, भोगेश्वर (Bhogeshwara) सुबह करीब 9:30 बजे बांदीपुर टाइगर रिजर्व (बीटीआर) के गुंद्रे रेंज में मृत पाया गया। 60 वर्षीय भोगेश्वर नागरहोल (Nagarahole) और बांदीपुर टाइगर रिजर्व (Bandipur Tiger Reserve And National Park) का गौरव था और विशाल और भयावह दांतों वाला यह जानवर पर्यटकों के लिए सबसे लोकप्रिय जानवरों में से एक था। अधिकारियों के अनुसार भोगेश्वर के दांत 2.58 मीटर और 2.35 मीटर लम्बे थे।

सबसे लंबे दांतों के लिए प्रसिद्ध

बांदीपुर टाइगर रिजर्व के निदेशक रमेश कुमार ने बताया, कि भोगेश्वर के पोस्टमार्टम से पुष्टि हुई है कि उसकी मौत प्राकृतिक कारणों से हुई थी और उस पर चोट के कोई निशान नहीं थे। नागरहोल और बांदीपुर टाइगर रिजर्व में पर्यटकों के लिए जंबो की सवारी काफी फेमस है। सभी वन्यजीव उत्साही, विशेष रूप से हाथी प्रेमियों के लिए यह वास्तव में दुखद खबर है। क्योंकि एशियाई हाथियों में सबसे लंबे दांतों के लिए प्रसिद्ध ये हाथी भोगेश्वर (Bhogeshwara) क्षेत्र में रहने वाले आदिवासियों और स्थानीय लोगों के बीच काफी प्रसिद्ध था। स्थानीय लोगों और वन अधिकारियों ने इस हाथी का नाम भोगेश्वर रखा था क्योंकि उसे भोगेश्वर शिविर के पास अक्सर देखा जाता था।

भोगेश्वर को कई वन्यजीव डाक्यूमेंट्री में दिखाया जा चूका है

हाथी भोगेश्वर (Bhogeshwara)

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के नियमों और विनियमों के अनुसार, जंबो के दांतों को हटाकर मैसूर अरण्य भवन (Mysore Aranya Bhavan) के संग्रहालय में रखने के लिए भेजा गया है। वहीं भविष्य में उसके दांतों को प्रदर्शनी में रखा जा सकता है। जबकि, जंगल में मृत मिले हाथी भोगेश्वर (Bhogeshwara) के शव को वन विभाग की परंपरा के अनुरूप गिद्धों के लिए छोड़ दिया गया है। हाथी को कई वन्यजीव डॉक्यूमेंटरीज और विभाग और कुछ निजी संगठनों द्वारा बनाई गई फिल्मों में भी फीचर किया गया है।

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