राष्ट्रपति उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू 
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द्रौपदी मुर्मू - संघर्ष भरे जीवन से राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार बनने वाली पहली आदिवासी महिला का सफर

2015 में, द्रौपदी मुर्मू को झारखंड की राज्यपाल नियुक्त किया गया, तब वह इस पद को संभालने वाली पहली आदिवासी महिला बनीं।

Aastha Singh

तेजस्वी सम्मान खोजते नहीं गोत्र बतला के,

पाते हैं जग में प्रशस्ति अपना करतब दिखला के।

सुप्रसिद्ध कवि श्री रामधारी सिंह दिनकर द्वारा लिखी गयीं इन पंक्तियों को चरितार्थ किया है आने वाले राष्ट्रपति चुनाव की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू जी ने। यूँ तो उनके नाम के साथ कई प्रथम उपलब्धियां जुड़ी हुई हैं लेकिन झारखंड की संथाल जातीय समूह की महिला को 21 जून को जब देश के सबसे बड़े संवैधानिक पद का उम्मीदवार चुना गया तो एक ऐसा मार्ग प्रशस्त हुआ जिसकी न उन्होंने न उनके समुदाय ने कभी कल्पना की होगी। एक ऐसा काम, एक ऐसे दुर्लभ स्थान और समुदाय से ताल्लुक़ रखने पर करना जिसे पहले किसी महिला ने न किया हो अपने आप में अदम्य साहस और सहनशीलता का सबब है। आज हम प्रयास करेंगे की द्रौपदी मुर्मू जी के जीवन की गहराईयों में जाकर वो साहस और परिश्रम से सजे मोती निकालकर लाएं जिनसे उन्होंने अपना जीवन पिरोया है।

गरीबी और त्रासदियों से उजागर राजनैतिक जीवन

राष्ट्रपति उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू

मयूरभंज जिले के बेहद पिछड़े बैदापोसी गांव में 20 जून 1958 को जन्मीं मुर्मू ने गरीबी और अन्य समस्याओं से जुझते हुए भुवनेश्वर के रमादेवी महिला कॉलेज से कला में स्नातक किया। उन्होंने ओडिशा सरकार के सिंचाई और बिजली विभाग में एक कनिष्ठ सहायक के रूप में अपना करियर शुरू किया था। उन्होंने, 1997 में रायरंगपुर नगर निकाय के पार्षद और उपाध्यक्ष के रूप में अपना राजनीतिक जीवन शुरू किया। उसी वर्ष, उन्हें ओडिशा भाजपा के एसटी मोर्चा का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया।

राष्ट्रपति उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू

मुर्मू देश के सबसे दूरस्थ और अविकसित जिलों में से एक में गरीबी और व्यक्तिगत त्रासदियों से जूझती हुई राजनीतिक रैंकों के माध्यम से ऊपर उठी हैं। उनका समृद्ध राजनीतिक और प्रशासनिक अनुभव भाजपा पार्टी के साथ उनके पदों में नज़र आता है। 2002-2009 तक, वे भाजपा के एसटी मोर्चा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य थीं। एक बार फिर, 2004 में, वह रायरंगपुर की विधायक बनीं, और फिर 2006 से 2009 तक भाजपा के एसटी मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त की गईं। 2015 में, जब उन्हें झारखंड की राज्यपाल नियुक्त किया गया, तो वह इस पद को संभालने वाली पहली महिला बनीं। ऐसा करते हुए, वह अपने गृह राज्य ओड़िशा की राज्यपाल बनने वाली पहली आदिवासी महिला भी बनीं।

राष्ट्रपति उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू

द्रौपदी मुर्मू का निजी जीवन भी भाग्य का मारा था क्योंकि उन्होंने अपने पति श्याम चरण मुर्मू और दो बेटों दोनों को खो देने के बाद, बहुत त्रासदी देखी है। ओडिशा में सिंचाई और बिजली विभाग में एक कनिष्ठ सहायक से लेकर पॉवर में मौजूद पार्टी की ओर से राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार नामित होने तक का सफर आदिवासी नेता द्रौपदी मुर्मू के लिए बेहद लंबा और मुश्किल रहा है। उन्होंने लिंग और सामाजिक बेड़ियों को तोड़कर मेहनत और ईमानदारी के दम पर अपने लिए एक विशेष जगह बनायीं है।

वहीं, अगर मुर्मू राष्ट्रपति बन जाती हैं तो इस पद पर पहुँचने वाली वे देश की पहली आदिवासी महिला होंगी।

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