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क्लासरूम ऑन व्हील्स - राजस्थान में ऑनलाइन शिक्षा को छात्रों के घर तक ले जाने की अनोखी पहल

यह प्लेटफार्म टॉप शिक्षकों और छात्रों के बीच के गैप को कम करके क्वालिटी शिक्षा प्रदान करने का प्रयास करता है।

Aastha Singh

महामारी के कारण हुए लॉकडाउन के चलते पूरे देश में डिजिटल शिक्षा की ज़रूरतों और महत्त्व को हम सभी ने भली- भांति समझा है। भारत ने डिजिटल शिक्षा की प्रभावशीलता और लाभों को अपनाने के भरसक प्रयास किये हैं। जैसे-जैसे देश तमाम चीज़ों की बेहतर उपलब्धता के लिए हर दिन ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स का सहारा ले रहा है, शिक्षा प्रणाली भी इस नए आयाम से पीछे नहीं है। एक अनोखे कदम में, राजस्थान में ग्रामीण बच्चों के लिए घर-घर शिक्षा के लाभों को मुहैया कराने के लिए पहली डिजिटल "क्लासरूम ऑन व्हील्स" की शुरुआत की गयी।

भारत के डाइवर्स एजुकेशन सिस्टम में भी, डिजिटल शिक्षा छात्रों और शिक्षकों दोनों के लिए अत्यधिक लाभकारी है और शिक्षा में रचनात्मक के नए द्वार खोलती है। अधिक से अधिक लोगों को सस्ती शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से, 'क्लासरूम ऑन व्हील्स' उर्फ 'शिक्षा रथ' भारत के गांवों और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले 50 लाख से अधिक छात्रों तक शिक्षा के लाभों को पहुंचाने उम्मीद शुरू किया है। माना जा रहा है की यह अनोखा कांसेप्ट राजस्थान में छात्रों को लाइव डिजिटल लर्निंग का अनुभव प्रदान करने वाला उत्तर भारत का पहला इन्नोवेटिव प्लेटफार्म है। डिजिटल लर्निंग को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई यह अपनी तरह की पहली पहल है।

भारत के एजुकेशन सिस्टम में डिजिटल गैप को काम करेगी

विशेष रूप से ग्रामीण भारत में अच्छे शिक्षकों की कमी को दूर करने के उद्देश्य से, यह प्लेटफार्म टॉप शिक्षकों और छात्रों के बीच के गैप को कम करके क्वालिटी शिक्षा प्रदान करने का प्रयास करता है।

'शिक्षा रथ' 13 अप्रैल से सड़कों पर है और इसके पहले चरण के तहत जोधपुर, जैसलमेर और बाड़मेर जिलों के छोटे शहरों और गांवों को कवर करने का प्रयास किया गया है। हाई-स्पीड इंटरनेट से लैस वैन वैनिटी वैन की तरह है, जिसमें बेडरूम, किचन, डाइनिंग एरिया और वॉशरूम हैं।

इस परियोजना को सच्चाई में बदलने वाले डॉ निर्मल गहलोत के अनुसार, इस पहल का लक्ष्य अगले 2 वर्षों में 5 मिलियन से अधिक छात्रों तक पहुंचना है। देश के हिंदी गढ़- राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली से शुरू हुई इस परियोजना से अगले 5 वर्षों में पूरे भारत में 10 और शिक्षा रथों को लॉन्च करने की उम्मीद है।

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