Plastic Cafe – गुजरात के इस कैफे में आप प्लास्टिक कचरा देकर खा सकतें हैं स्वच्छ एवं स्वादिष्ट खाना

सिंगल यूज़ प्लास्टिक बैन की मुहीम देश भर में ज़ोरो से चल रही है। जैसे ही शुक्रवार (1 जुलाई) को सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध लागू हुआ, प्लास्टिक के इस्तेमाल से होने वाली प्राकर्तिक दुष्प्रभावों को रोकने के सभी प्रदेशों में भरसक प्रयास किये जा रहे हैं। पूरी देश की जनता में यह सन्देश पहुंचाने की कोशिश की जा रही है की प्लास्टिक का इस्तेमाल किस प्रकार हमें प्राकृतिक संसाधनों की कमी की ओर धकेल रहा है। ऐसे में गुजरात में एक कैफे प्लास्टिक कचरे से निपटने का एक अद्भुत तरीका लेकर आया है।

इस कैफे में आपको प्लास्टिक के बदले खाना मिलेगा। जूनागढ़ (Junagadh) के इस कैफ़े का नाम है ‘प्राकृतिक प्लास्टिक कैफ़े (Natural Plastic Cafe)। इस अनोखे कैफ़े का उद्घाटन गुजरात के राज्यपाल ने गुरुवार (30 जून) को किया। कैफे की स्थापना जूनागढ़ जिला प्रशासन द्वारा की गई है। आईये इस कैफ़े की विशेषताओं पर नज़र डालते हैं।

एक परिवर्तनकारी पहल

इस प्राकृतिक प्लास्टिक कैफे (Natural Plastic Café) में कस्टमर्स प्लास्टिक में पेमेंट कर करेंगे। खाने के बिलों का पेमेंट रुपये से करने के बजाय, ग्राहक कैफे में जो खाना ऑर्डर करना चाहते हैं उसके लिए प्लास्टिक कचरे से पेमेंट कर सकते हैं। ग्राहकों को अपने घरों से प्लास्टिक कचरा लाना होगा और उन्हें प्लास्टिक के वजन के आधार पर खाना परोसा जाएगा। कैफे द्वारा एकत्र किए गए कचरे को एक रीसाइक्लिंग एजेंसी (Recycling Agency) को दिया जाएगा, जिसका टाईअप जूनागढ़ प्रशासन के साथ है।

कैफ़े के बारे में बात करते हुए जूनागढ़ (Junagadh) के कलेक्टर ने कहा, हम जूनागढ़ में स्वच्छता और हरियाली को बढ़ावा देना चाहते हैं। सबसे पहले हम 500 ग्राम प्लास्टिक कचरे के लिए एक गिलास नींबू का रस या सौंफ का रस और 1 किलोग्राम प्लास्टिक कचरे के लिए एक प्लेट ढोकला या पोहा देंगे। जितना अधिक प्लास्टिक कचरा, उतनी बड़ी थाली दी जायेगी।

जबकि जिला प्रशासन ने कैफे को बनाया है लेकिन कैफे का संचालन और प्रबंधन सर्वोदय सखी मंडल (Sarvodaya Sakhi Mandal) की महिलाओं के एक समूह द्वारा किया जाएगा, जिन्होंने कथित तौर पर कैफे के विकास के लिए 50,000 रुपये का योगदान दिया है।

कैफे की अन्य इको- फ्रेंडली विशेषताएं

कैफे भोजन के लिए केवल किसानों से जैविक और स्थानीय रूप से प्राप्त सामग्री का उपयोग करेगा। सभी व्यंजन मिट्टी के बर्तनों में परोसे जाएंगे।

रेस्तरां में मिलने वाले बेवरेज़ साफ़ होंगे – वे पान के पत्ते, गुलाब, अंजीर और बेल के पत्ते से बने होंगे, और मिट्टी के बर्तनों में परोसे जाएंगे। मेन्यू में काठियावाड़ी और गुजरात की थाली होगी जिसमें बैगन भर्ता, सेव तमेता, थेपला और बाजरा रोटियां शामिल होंगी।

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