उत्तर प्रदेश के कानपुर में मौजूद मशहूर कछुआ तालाब को पुनर्जीवित करने के प्रयास किये जा रहे हैं। माना जाता है की ऐतिहासिक कछुआ तालाब में 100 वर्ष से अधिक आयु के कछुओं का घर है। वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों ने जानकारी दी कि पनकी क्षेत्र में एक पुराने शिव मंदिर के तहत आने वाले इस तालाब को 350 साल पुराना माना जाता है और इसे गंगा के किनारे स्थित औद्योगिक शहर कानपुर के सबसे पुराने और सबसे महत्वपूर्ण जल निकायों में गिना जाता है।
70 लाख के पुनर्जीवन परियोजना को मिली मंजूरी
कानपुर मंडल के आयुक्त राज शेखर ने कहा, ”यह कछुओं के प्रजनन के लिए एक महत्वपूर्ण जल निकाय भी है। यह हजारों छोटे और बड़े कछुओं का घर हुआ करता था, लेकिन पानी की कमी और प्रदूषण आदि के कारण कई कछुओं की मौत हो चुकी है। उन्होंने यह भी बताया की इस ऐतिहासिक जल निकाय को जीवित रखने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने 2017 में नगर निगम की 2 करोड़ रुपये की परियोजना को मंजूरी दी थी।
2017 से 2020 तक निगम ने 1.7 करोड़ रुपये खर्च कर कुछ कार्य किए, लेकिन जल निकाय का पूरी तरह से कायाकल्प नहीं हो पाया। लेकिन अब ऐतिहासिक जल निकाय को जीवित रखने के महत्त्व पर विचार-विमर्श के बाद, लंबित कार्यों को पूरा करने के लिए नगर निगम को 70 लाख रुपये की परियोजना को मंजूरी दी गई है। पिछले कुछ दिनों में काम शुरू हो गया है और यह अगले तीन महीनों में पूरा हो जाएगा।”
तालाब में होगा सुविधाओं और आकर्षण का विस्तार
कछुआ तालाब के फिलहाल जारी पुनर्जीवन के कार्यों में तालाब की गहराई दो मीटर बढ़ाना, रोशनी की व्यवस्था करना, आसपास सार्वजनिक शौचालय स्थापित करना और टाइलों की मरम्मत करना शामिल है। यह पुनर्जीवन परियोजना निश्चित रूप से तालाब में कछुओं की संख्या को बढ़ाएगी और इस ऐतिहासिक तालाब को उसकी मंद होती गरिमा को वापस दिलवाएगी।
