उत्तर प्रदेश सरकार ने कैबिनेट बैठक में यूपी फायर एंड इमरजेंसी सर्विस अध्यादेश 2022 को मंजूरी दे दी है और आगामी सत्र में बिल लाया जाएगा। इस बिल को केंद्र सरकार के मॉडल फायर एंड इमरजेंसी सर्विस बिल-2019 को स्वीकार करते हुए तैयार किया गया है। और अब हाउस, वॉटर टैक्स की तरह ही फायर टैक्स भी देना होगा।
बिल के मुताबिक अब सभी बड़े और कमर्शियल भवनों के लिए फायर सेफ्टी ऑफिसर को रखना अनिवार्य कर दिया गया है। डीजीपी फायर सर्विस द्वारा उपलब्ध कराए गए प्रस्ताव के अनुसार बिल के कुल 11 अध्याय सहित 69 धाराओं में से 54 धाराओं को यथावत स्वीकार किया गया है और 15 धाराओं में संशोधन करते हुए स्वीकार किया गया है।
इसके तहत कमर्शियल भवनों के लिए फायर सेफ्टी ऑफिसर का फायर डिपार्टमेंट पहले टेस्ट लेगा। टेस्ट में पास होने के बाद ही उसकी नियुक्ति हो सकेगी और इनके वेतन का खर्च भी भवन मालिक को ही उठाना होगा। अगर कोई कमर्शियल भवन फायर सेफ्टी ऑफिसर को नहीं रखता है तो नियमानुसार जुर्माना लगाया जाएगा।
अब आग लगने पर फायर सेफ्टी एक्ट के तहत होगी कार्रवाई
यूपी फायर एंड इमरजेंसी सर्विस अध्यादेश 2022, लागू होने के बाद फायर ब्रिगेड आपातकालीन सेवाओं में शामिल हो जाएगा। अभी तक यह एक बचाव दल की हैसियत से काम कर रहा था। इस बिल के लागू होने से आग लगने के कारणों की बेहतर ढंग से जांच होगी और जिम्मेदारों के खिलाफ फायर सेफ्टी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज होगा। अगर आग लगने का कारण भवन मालिक की लापरवाही है और उससे जानमाल का नुकसान हुआ है तो मुआवजा भी उसी से वसूला जाएगा।
इसके साथ ही अगर किसी भवन में आग से बचाव के मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है, तो उस स्थिति में विभाग के पास पूरा नोटिस देकर जांच करने का पूरा और भवन को खाली करवाकर उसे सील करने का भी अधिकार होगा। और अगर आपातकालीन स्थिति में जिम्मेदार कर्मचारियों के भाग जाने पर उसके विरुद्ध FIR भी दर्ज की जा सकेगी।
देना होगा फायर टैक्स
यूपी फायर एंड इमरजेंसी सर्विस अध्यादेश 2022 के तहत अब हाउस और वॉटर टैक्स की तरह ही फायर टैक्स भी लिया जाएगा और इसका प्रावधान बिल में किया गया है। फायर टैक्स से फायर डिपार्टमेंट के उन अधिकारीयों और कर्मचारियों को मुआवजा दिया जाएगा, जो राहत एंव बचाव कार्य के दौरान घायल या दुर्घटना का शिकार होंगे।
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