कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को छठ (Chhath) पूजा होती है, और यह पर्व चल दिन तक चलता है। इस साल छठ का महापर्व 28 अक्टूबर से शुरू होकर 31 अक्टूबर तक चलेगा। छठ पूजा को धार्मिक परम्परा के अनुसार नदियों और नहरों के किनारे पुरुष और महिलाओं द्वारा सूर्य को अर्ध्य देकर पूजा-अर्चना कर श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। लखनऊ में गोमती नदी के किनारे स्थित लक्ष्मण मेला मैदान और झूलेलाल वाटिका में सबसे ज्यादा लोग एकत्र होते हैं और पूजा करते हैं।
वहीं, छठ पूजा को लेकर घाटों पर सफाई के साथ ही अन्य व्यवस्थाओं को करवाने के लिए नगर निगम ने शहर में दस सेक्टर बनाए हैं।
लखनऊ में यहां होगी छठ पूजा
सेक्टर 1 – लक्ष्मण मेला स्थित छठ पूजा।
सेक्टर 2 – झूलेलाल घाट।
सेक्टर 3 – शाहीनूर कालोनी के सामने वाला मैदान। राजा राहुल सिटी छठ पूजा घाट। निराला गुप्ता के मकान के पास शाहीनूर कालोनी। पाठकपुरम रायबरेली रोड, लखनऊ। सरस्वती पुरम पीजीआई में छठ पूजा घाट।
सेक्टर 4 – मनकामेश्वर वाटिका घाट। कदम रसूल वार्ड मोहन मीकिन पक्का पुल (संजिया घाट)। अयोध्यादास वार्ड द्वितीय बन्धा बैरल नं. 2 घाट।
सेक्टर 5 – गौरी में श्री हीरालाल ला कालेज के बगल में। रनियापुर में नवनिर्मित छठ पूजा घाट। सरोजनी नगर में सैनिक स्कूल के पास।आजाद नगर सरोजनी नगर में छठ पूजा घाट।
सेक्टर 6 – हिन्दनगर एलडीए. कालोनी कानपुर रोड लखनऊ। पीडब्ल्यूडी कालोनी, लोक कालेश्वर मंदिर के पास।
सेक्टर 7 – चिनहट प्रथम वार्ड में छोहरिया माता मंदिर प्रांगण स्थित तालाब पर। काल्विन कालेज-निशातगंज वार्ड के पंचमुखी हनुमान मंदिर के पीछे छठ घाट।
सेक्टर 8 – कुड़िया घाट
सेक्टर 9 – सेक्टर आईएलडीए कालोनी कानपुर रोड। रुचिखंड-2 में नागेश्वर मंदिर के पास छठ पूजा घाट। सरोजनी नगर द्वितीय में छठ पूजा घाट। दुर्गापुरी कालोनी में सामुदायिक केन्द्र के पास। उतरेठिया में पम्पी सिंह के घर के पास।
सेक्टर 10 – कुकरैल पिकनिक स्पॉट के पास चयनित घाट।
क्यों मनाया जाता है छठ पर्व ?
पौराणिक कथा के अनुसार, छठी मईया भगवान ब्रह्माजी की मानस पुत्री और सूर्यदेव की बहन है। इन्ही मईया को प्रसन्न करने के लिए छठ पूजा का आयोजन किया जाता है। पुराणों के अनुसार, जब ब्रह्माजी सृष्टि की रचना कर रहे थे, तब उन्होंने अपने आपको दो भागों में बांट दिया था। ब्रह्माजी का दायां भाग पुरुष और बायां भाग प्रकृति के रूप में सामने आया। प्रकृति सृष्टि की अधिष्ठात्री देवी बनीं, जिनको प्रकृति देवी के नाम से जाना गया। प्रकृति देवी ने अपने आपको छह भागों में विभाजित कर दिया था और उनके छठे अंश को मातृ देवी या देवसेना के रूप में जाना जाता है। प्रकृति के छठे अंश होने के कारण इनका नाम ‘पष्ठी’ भी पड़ा, जिसे छठी माई के नाम से जाना जाता है। बच्चे के जन्म होने के बाद छठवें दिन जिस माता की पूजा की जाती है, यही वही पष्ठी देवी है।
इसके साथ ही छठ का व्रत रोगों से मुक्ति, संतान के सुख और समृद्धि में वृद्धि के लिए भी रखा जाता है। मान्यता है कि सच्चे मन से व्रत रखने से मनोकामना जरूर पूरी होती है और जिसकी मनोकामना पूरी होती है, वह कोसी भरते हैं। बहुत से लोग घाटों पर दंडवत पहुंचते हैं। इसके साथ ही ऐसी मान्यता है कि पष्ठी देवी की आराधना करने पर बच्चे को सफलता का आशीर्वाद मिलता है।
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