लखनऊ की ‘शांति हीरानंद’ जिन्हे दुनिया भर में अपने गुरु की संगीत निपुणता के ध्वजवाहक के रूप में जाना जाता है। शान्ति जी ने दुनिया भर में गायकी, ठुमरी, भजन और दादरा की अपनी परफॉरमेंस में गजलों की अद्वितीय रानी’ ‘बेग़म अख़्तर’ की विरासत को आगे बढ़ाया है। अख्तर की पहली शिष्या, शांति हीरानंद जिन्होंने गंडा-बंद (विद्यार्थियों को शामिल करने के लिए एक पवित्र अनुष्ठान) के समारोह में भाग लिया। बेगम शांति से इतनी प्यार करती थी कि 50 के दशक में जब शांतीजी ने अपना पासपोर्ट बनवाया तो बेग़म ने अपनी सबसे समर्पित शिष्या के नाम के आगे अपना उपनाम जोड़ दिया।
लगभग पाँच दशकों तक शांतिजी ने बेग़म अख़्तर की परंपरा में ग़ज़ल, दादरा और ठुमरी को परफॉर्म और रिकॉर्ड तो किया ही, साथ ही उन्होंने इन सुरीली कला को मेहनत से उन सबको सिखाया जो महान गायिका की परंपरा का हिस्सा बनना चाहते थे।
