इंदौर नगर निगम (इंदौर) और प्रशासन ने हाल ही में जल निकायों को फिर से भरने, अंडरग्राउंड को रिचार्ज करने और जहां भी संभव हो वर्षा जल संचयन सिस्टम (rain water harvesting system) स्थापित करने के उपायों को बढ़ाना शुरू कर दिया है। इसी दिशा में एक और कदम उठाते हुए वर्षा जल संचयन (rain water harvesting) के लिए स्मार्ट पेड़ लगाने की योजना भी सामने आई है। यह निर्णय लिया गया है कि पेड़ चार स्थानों, शिवाजी वाटिका स्क्वायर, महू नाका, कलेक्ट्रेट और ट्रेंचिंग ग्राउंड पर लगाए जाएंगे।
परियोजना में दो से तीन महीने का समय लगेगा
स्मार्ट पेड़ों के स्ट्रक्चर की ऊंचाई 15 से 20 फीट होगी। ऊपर के हिस्से में उल्टी छतरीनुमा स्ट्रक्चर (umbrella structure) होगा। इसमें बारिश का पानी एकत्र होगा और इसे पाइप लाइन के माध्यम से जमीन में पहुंचाया जाएगा। स्मार्ट ट्री के स्ट्रक्चर में जमीन में 8 से 10 फीट गहरा गड्ढा किया जाएगा और इसमें फिल्टर भी लगाया जाएगा। बारिश के दौरान जहां यह स्मार्ट ट्री पानी को सहेजेगा। वही इन्हें ऐसे स्थानों पर तैयार किया जाएगा जहां लोग धूप व बारिश से इसके नीचे बचने के लिए खड़े भी हो सके। अंडरग्राउंड लेवल तक वर्षा जल की मात्रा को मापने के लिए एक मीटर भी लगाया जाएगा।
अधिकारियों के मुताबिक इन पेड़ों के निर्माण और स्थापना में 2 से 3 महीने का समय लगेगा। यह भी बताया गया है कि इन संरचनाओं के निर्माण के लिए वेस्ट मटेरियल का पुन: उपयोग किया जाएगा। प्लास्टिक पाइप, स्क्रैप मेटल और मेटल मेश जैसी वस्तुओं का उपयोग किया जाएगा। परियोजना के लिए आवश्यक कंक्रीट को पुरानी ईंटों और फुटपाथ की टाइलों का उपयोग कर बनाया जाएगा।
स्मार्ट पेड़ों के कई कार्य
विभिन्न फैक्टर्स को ध्यान में रखते हुए उनकी स्थापना के लिए स्थानों का चयन किया गया है। बारिश के पानी को इकट्ठा करने के अलावा पेड़ कई अन्य कार्य भी करेंगे। स्मार्ट पेड़ इस तरह लगाए जाएंगे कि लोग दिन में धुप से बचने के लिए उनके नीचे कुछ छाया पा सकें। रात के समय आकर्षक दिखने के लिए टावर जैसी संरचनाओं को भी रोशनी से सजाया जाएगा। रात के समय इन स्मार्ट ट्री पर आर्कषक रोशनी भी की जाएगी ताकि लोगों को यह स्मार्ट ट्री आकर्षित करे और लोग इसके साथ खड़े होकर सेल्फी भी ले सके।
